ऊखीमठ (रुद्रप्रयाग)। केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों के पारंपरिक अधिकारों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर सिविल न्यायालय ऊखीमठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि तीर्थ पुरोहित अपने यजमानों के साथ बिना किसी बाधा के मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगे और परंपरागत धार्मिक कार्य संपादित करने के अधिकार बनाए रखेंगे।
अदालत के निर्णय के अनुसार तीर्थ पुरोहित मंदिर के भीतर पूजा-अर्चना, अभिषेक, संकल्प, रुद्रीपाठ कराने के साथ ही यजमानों से दान-दक्षिणा प्राप्त करने के अपने वंशानुगत अधिकारों का उपयोग कर सकेंगे।
इस मामले में तीर्थ पुरोहित समाज की ओर से अधिवक्ता सुशील भट्ट, हार्दिक रावत और आनंद बजवाल ने न्यायालय में पक्ष रखा। कानूनी और ऐतिहासिक आधारों पर की गई पैरवी के बाद न्यायालय ने यह निर्णय सुनाया।
फैसले के बाद तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय हक-हकूकधारियों में खुशी का माहौल है। पुरोहित समाज ने इसे धार्मिक परंपराओं और लंबे समय से चले आ रहे अधिकारों की मान्यता बताते हुए अधिवक्ताओं का आभार जताया।
पुरोहित समाज का कहना है कि यह फैसला केवल कानूनी सफलता नहीं, बल्कि बाबा केदारनाथ धाम की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।