देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने में कुछ ही महीने शेष हैं, लेकिन विधायक निधि के खर्च की गति को लेकर सामने आए आंकड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022-23 से जून 2026 तक विधायकों के लिए उपलब्ध कराई गई कुल विधायक निधि में से करीब 66 प्रतिशत राशि ही खर्च हो पाई है, जबकि लगभग 34 प्रतिशत राशि खर्च नहीं हुई है।
आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में प्रदेश के विधायकों के लिए कुल 1,664 करोड़ रुपये की विधायक निधि स्वीकृत और उपलब्ध कराई गई थी। इसमें से 1,091.29 करोड़ रुपये ही विकास कार्यों पर खर्च किए जा सके।
प्रदीप बत्रा सबसे आगे, धन सिंह रावत सबसे पीछे
मंत्रियों में रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा विधायक निधि खर्च करने में सबसे आगे हैं। उन्होंने करीब 77 प्रतिशत निधि खर्च की है। सितारगंज विधायक एवं मंत्री सौरभ बहुगुणा 72 प्रतिशत के साथ दूसरे और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज 68 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर हैं।
राजपुर रोड विधायक खजान दास ने 66.11 प्रतिशत निधि खर्च की है। चंपावत विधायक एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 65.61 प्रतिशत खर्च के साथ मंत्रियों में पांचवें स्थान पर हैं। मसूरी विधायक गणेश जोशी ने 65.45 प्रतिशत और भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा ने करीब 62 प्रतिशत निधि खर्च की है।
सोमेश्वर विधायक एवं मंत्री रेखा आर्या करीब 60 प्रतिशत खर्च के साथ आठवें, नरेंद्रनगर विधायक एवं मंत्री सुबोध उनियाल 57 प्रतिशत के साथ नौवें स्थान पर हैं। श्रीनगर विधायक एवं मंत्री डॉ. धन सिंह रावत करीब 37 प्रतिशत निधि खर्च के साथ मंत्रियों में सबसे नीचे हैं।
किशोर उपाध्याय की निधि खर्च सबसे कम
सभी विधायकों के आंकड़ों में टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय करीब 30 प्रतिशत विधायक निधि खर्च के साथ सबसे निचले स्तर पर बताए गए हैं। इसके बाद डॉ. धन सिंह रावत 37 प्रतिशत और यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट 44 प्रतिशत खर्च के साथ हैं।
विधानसभा चुनाव नजदीक होने के बीच सामने आए ये आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। विधायक निधि का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं होने से विकास कार्यों की गति और उपलब्ध बजट के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, निधि खर्च की स्थिति के पीछे प्रशासनिक प्रक्रियाओं और विभिन्न स्तरों पर स्वीकृति जैसी वजहों की भी भूमिका हो सकती है।