आईसीएआर – भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (आईआईएसडब्ल्यूसी), देहरादून द्वारा विकसित कृषि संकल्प अभियान (वीकेएसए)-2025, जो 29 मई से 12 जून 2025 तक आयोजित
Category: खेती-किसानी
उत्तराखंड में मृदा और जल संरक्षण बनी किसानों की सबसे बड़ी चिंता, ICAR-IISWC की तकनीकी पहल ला रही राहत
देहरादून, 4 जून 2025: उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में मृदा क्षरण और जल संरक्षण से जुड़ी समस्याएं दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही हैं।
VKSA 2025: खेतों तक पहुँचे वैज्ञानिक, खरीफ फसलों की समस्याओं का किया गहराई से अध्ययन
विकसित कृषि संकल्प अभियान (VKSA) 2025 के अंतर्गत, आईसीएआर–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून ने अपनी विस्तार गतिविधियों को तेज करते हुए 1
प्राकृतिक खेती से बदलेगी किस्मत, उत्तराखंड में कपूर की खेती बनेगी आमदनी का जरिया
उत्तराखंड में अब प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदमों के बीच कपूर (Cinnamomum camphora) की खुशबू फैलने वाली है। सगंध पौध केंद्र, सेलाकुई के दस
खरीफ फसलों की तैयारी: ICAR-IISWC वैज्ञानिकों ने 21 गांवों में 950 किसानों को किया जागरूक
विकसित कृषि संकल्प अभियान (29 मई – 12 जून 2025) के अंतर्गत, जो कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा आरंभ किया
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में भीषण सड़क हादसा, कांग्रेस नेता के पिता समेत चार लोगों की मौत
टिहरी गढ़वाल, 19 मई 2025 — उत्तराखंड के टिहरी जनपद में सोमवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत
ग्राफिक एरा में कौथिक-25: मंडुवे और बुरांश से बने विदेशी व्यंजन
देहरादून, 23 अप्रैल। जायके के सफर में पहाड़ के मंडुवे और बुरांश को विदेशी व्यंजनों से जोड़ दिया। ग्राफिक एरा के कौथिग-25 में होटल मैनेजमेंट
उत्तराखंड में पहली बार उगाया गया दुनिया का सबसे महंगा मशरूम, कीमत चौंका देगी…
उत्तराखंड के इंजीनियर नवीन पटवाल ने दुनिया की सबसे महंगी मशरूम में से एक गुच्छी मशरूम की सफल खेती कर भारत में नया कीर्तिमान रचा
सीएम आवास में निकाला गया शुद्ध शहद सीएम धामी ने लिया स्वाद
मुख्यमंत्री आवास परिसर में आज शहद निष्कासन कार्य किया गया। पहले चरण में 57 किलोग्राम शहद निकाला किया गया। इस बार लगभग 200 किलोग्राम तक
फल, सब्जियाँ और जड़ी-बूटियाँ ताज़ा कैसे रखें: आसान और कारगर उपाय
Tips: To Store Herbs Retaining their Potency क्या आप अपने खाना पकाने में जड़ी-बूटियों का उपयोग करते हैं और उन्हें मुरझाते और खराब होते देखना