नैनीताल: उत्तराखंड में प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने राज्य सरकार से अब तक लिए गए निर्णयों का अवलोकन प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने पूर्व में भी इस मामले में शिक्षा विभाग के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की थी।
मामला वर्ष 2016 की प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें कई अभ्यर्थियों की नियम विरुद्ध नियुक्ति और 11 योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित रखने का आरोप है। नियुक्ति से वंचित विनय कुमार समेत अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी थी। मामले में शिक्षा विभाग के साथ वे शिक्षक भी प्रतिवादी हैं, जिन्हें नियुक्ति मिल चुकी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शिक्षा निदेशालय को नियम विरुद्ध नियुक्त शिक्षकों की सेवाओं में बाधा डाले बिना, नियुक्ति से वंचित 11 अभ्यर्थियों को समायोजित करने का रास्ता निकालना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि तत्कालीन निदेशक ने सरकार के आदेशों का पालन नहीं किया।
वहीं, नवंबर 2025 में जारी सहायक अध्यापक प्राथमिक भर्ती विज्ञापन में कोर्ट के निर्देश पर 11 पद सुरक्षित रखे गए थे, ताकि प्रभावित अभ्यर्थियों को समायोजित किया जा सके। अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि सीबीएसई और एनसीटीई द्वारा अपात्र घोषित किए जाने के बावजूद चयन समिति ने बिना योग्यता जांचे कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति की सिफारिश कैसे कर दी।
सुनवाई के दौरान विभागीय सचिव ने सुप्रीम कोर्ट के “देवेश शर्मा बनाम भारत संघ” मामले का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं को बीएड डिग्रीधारी होने के कारण अपात्र बताया। हालांकि याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि राज्य सरकार पहले ही इन अभ्यर्थियों को 2016 के विज्ञापन के अनुसार पात्र मान चुकी है।
हाईकोर्ट ने मामले में “बैलेंसिंग ऑर्डर” पारित करते हुए कहा कि पहले से नियुक्त शिक्षकों की सेवाएं प्रभावित किए बिना याचिकाकर्ताओं को न्याय दिया जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षित रखे गए 11 पदों पर योग्य अभ्यर्थियों को समायोजित करने का समाधान निकाला जाए।
अदालत ने विभाग द्वारा बार-बार भ्रामक हलफनामे दाखिल किए जाने पर भी नाराजगी जताई और कहा कि न्यायिक निर्देशों को विफल करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब मामले की अगली सुनवाई में सरकार को अब तक लिए गए निर्णयों का पूरा विवरण पेश करना होगा।