बजेटी। उत्तराखंड की लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘लोक विरासत जनजातीय एवं लोक कला समिति’ की ओर से बुधवार को राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (जीजीएचएसएस) बजेटी में एक दिवसीय निःशुल्क लोक वाद्य यंत्र कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में विद्यालय की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए उत्तराखंड के पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों जैसे हुड़का और डोर-थाली के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्रतिभागियों को इन वाद्य यंत्रों को बजाने की तकनीक सिखाने के साथ ही उनसे जुड़े पारंपरिक लोकगीतों का भी प्रशिक्षण दिया गया।
इस अवसर पर समिति के संस्थापक पीयूष धामी ने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के बावजूद अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोक वाद्य हमारी पहचान और सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी हम सभी की है।
पीयूष धामी ने कम उम्र में ही ‘लोक विरासत जनजातीय एवं लोक कला समिति’ की स्थापना कर युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने का अभियान शुरू किया। उनकी यह पहल लोक संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में सराहनीय प्रयास मानी जा रही है।
कार्यक्रम में स्मृति भट्ट, प्रियंशु राज, कविता पंत सहित कई शिक्षक, संस्कृति प्रेमी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने इस प्रकार की कार्यशालाओं को लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी सराहना की।