यहाँ अब ट्रैकिंग करना होगा महंगा! गंगाड़ ग्राम सभा ने लागू किए नए नियम, 50 हजार तक जुर्माने का प्रावधान

यहाँ अब ट्रैकिंग करना होगा महंगा! गंगाड़ ग्राम सभा ने लागू किए नए नियम, 50 हजार तक जुर्माने का प्रावधान

उत्तरकाशी। जनपद के मोरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा गंगाड़ ने क्षेत्र में संचालित ट्रैकिंग गतिविधियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित खुली बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से विभिन्न ट्रैकिंग मार्गों पर कार्यरत कंपनियों के लिए नए नियम और शर्तें लागू करने का प्रस्ताव पारित किया।

ग्राम सभा के निर्णय के अनुसार गंगाड़ क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जोन बाम्बे–रुईसारा ट्रैक, बाली पास ट्रैक, काला नाग (ब्लैक पीक) ट्रैक और धोनदार कांटी पास ट्रैक पर आने वाले प्रत्येक ट्रैकिंग दल को स्थानीय विकास और पर्यावरण संरक्षण शुल्क के रूप में 2,000 रुपये प्रति ग्रुप ग्राम पंचायत में जमा करने होंगे।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

बैठक में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट किया गया कि सभी ट्रैकिंग कंपनियां अपने दल द्वारा उत्पन्न प्लास्टिक और अन्य कचरे को वापस लाने के लिए जिम्मेदार होंगी। ट्रैकिंग मार्गों, बुग्यालों और अन्य प्राकृतिक स्थलों पर किसी भी प्रकार का कचरा छोड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई

ग्राम सभा ने धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने को भी अनिवार्य किया है। साथ ही बिना अनुमति स्थायी कैंप लगाने पर रोक लगा दी गई है। निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाली ट्रैकिंग कंपनियों पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। गंभीर मामलों में संबंधित कंपनी के भविष्य में ग्राम सभा क्षेत्र में ट्रैक संचालन पर प्रतिबंध लगाने की संस्तुति भी की जा सकती है।

जल स्रोतों और बुग्यालों की सुरक्षा पर फोकस

ग्राम सभा ने क्षेत्र के जल स्रोतों, बुग्यालों और चारागाहों को प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा ग्राम पंचायत द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करना सभी ट्रैकिंग कंपनियों के लिए अनिवार्य होगा।

12 जून तक जमा करना होगा शुल्क

ग्राम सभा ने सभी ट्रैकिंग कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे 12 जून 2026 तक प्रति ग्रुप 2,000 रुपये का निर्धारित शुल्क ग्राम प्रधान के माध्यम से ग्राम पंचायत में जमा कराना सुनिश्चित करें।

ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों, बुग्यालों, जल स्रोतों और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना तथा ट्रैकिंग गतिविधियों को अधिक जिम्मेदार और व्यवस्थित बनाना है।