देहरादून। उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। राज्य की साक्षरता दर अब बढ़कर 98.7 प्रतिशत हो गई है, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 95 प्रतिशत के मानक से काफी अधिक है।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि वर्ष 2023-24 में राज्य की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत थी, जो लगातार प्रयासों के बाद वर्ष 2025 में बढ़कर 98.7 प्रतिशत तक पहुंच गई। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय शिक्षा विभाग, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों को दिया।
केंद्र सरकार के नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (उल्लास) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी राज्य की साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक होने पर उसे पूर्ण साक्षर राज्य माना जा सकता है। इसी आधार पर उत्तराखंड सरकार ने प्रस्ताव तैयार किया, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के संशोधित मानकों के अनुरूप यह प्रस्ताव शासन को भेजा था। प्रस्ताव में बताया गया कि वृद्धावस्था, गंभीर बीमारी और मानसिक अथवा बौद्धिक अक्षमता जैसे कारणों से शत-प्रतिशत साक्षरता व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, इसलिए 95 प्रतिशत को पूर्ण साक्षरता का मानक निर्धारित किया गया है।
उल्लास कार्यक्रम के तहत किए गए आकलन के अनुसार, सात वर्ष से अधिक आयु की राज्य की पात्र आबादी लगभग 1.23 करोड़ है। इनमें केवल 1.31 लाख लोग ही निरक्षर श्रेणी में हैं, जो कुल आबादी का लगभग 1.3 प्रतिशत है। यही आंकड़े उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने का आधार बने हैं।
राज्य सरकार का मानना है कि इस उपलब्धि से शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड की पहचान और मजबूत होगी तथा भविष्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और साक्षरता अभियान को नई गति मिलेगी।