देहरादून। उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए अब उनकी निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है। ग्लेशियर झीलों के जलस्तर, आकार और अन्य बदलावों पर रियल टाइम नजर रखने के लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और सेंसर आधारित तकनीक का उपयोग किया जाएगा। संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित कर समय रहते लोगों को अलर्ट करने की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में रविवार को ग्लेशियर झीलों की स्थिति और उनसे जुड़े संभावित जोखिम को लेकर समीक्षा बैठक हुई। बैठक में उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए ग्लेशियरों और ग्लेशियर झीलों में होने वाले बदलावों की वैज्ञानिक निगरानी को जरूरी बताया गया।
अचानक बढ़ सकता है खतरा
हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों के आकार में वृद्धि या जलस्तर में अचानक बदलाव भविष्य में गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे में संभावित खतरे की समय रहते पहचान कर प्रभावित क्षेत्रों तक चेतावनी पहुंचाना महत्वपूर्ण है। इसी को देखते हुए रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करने के साथ संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संस्थानों और तकनीकी एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा।
जरूरत वाले क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे असामान्य गतिविधियों की समय रहते जानकारी मिल सके और संभावित प्रभावित आबादी को पहले ही सतर्क किया जा सके।
बारिश को लेकर भी 24×7 अलर्ट मोड
बैठक में प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों की भी समीक्षा की गई। नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों, राहत-बचाव कार्यों के साथ बिजली, पेयजल और संचार सेवाओं की स्थिति की जानकारी ली गई। मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र को 24×7 अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
भूस्खलन संभावित और बार-बार सड़क बंद होने वाले स्थानों पर पहले से जेसीबी, पोकलैंड समेत पर्याप्त मशीनरी और तकनीकी दल तैनात रखने पर जोर दिया गया है, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जा सके।
जरूरी सामान का पहले से होगा भंडारण
दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने की स्थिति को देखते हुए खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के बीच समन्वय के साथ राहत-बचाव व्यवस्था सक्रिय रखी जाएगी।
मौसम देखकर होगा यात्रा संचालन
अत्यधिक बारिश या सड़क बंद होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मार्ग और मौसम की स्थिति सामान्य होने के बाद ही आगे की यात्रा की अनुमति दी जाएगी।
आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों के साथ बैठक कर अब तक की तैयारियों की समीक्षा की और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की।