चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्रतल से करीब 11,808 फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध रुद्रनाथ धाम के कपाट 17 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में की जाएगी।
रुद्रनाथ धाम पंचकेदार में शामिल है। यहां भगवान शिव के एकानन यानी मुख स्वरूप की पूजा होती है। धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सगर गांव से करीब 19 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
लगातार पहुंच रहे श्रद्धालु
मंदिर के पुजारी हरीश भट्ट के अनुसार इन दिनों रुद्रनाथ धाम में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। फिलहाल यात्रा के लिए मौसम और पैदल मार्ग की परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि कपाट बंद होने से पहले रुद्रनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन करें।
सितंबर में खिलते हैं रंग-बिरंगे फूल
सितंबर के महीने में रुद्रनाथ घाटी में विभिन्न प्रजातियों के फूल खिलने लगते हैं, जिससे क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। हिमालय की ऊंची चोटियों से घिरे इस धाम की यात्रा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद देती है।
यात्रा मार्ग पर मिलती हैं सुविधाएं
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पैदल मार्ग में अलग-अलग स्थानों पर ठहरने और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है। स्थानीय स्तर पर भी यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
नंदा देवी और त्रिशूल के होते हैं दर्शन
रुद्रनाथ धाम चारों ओर से हिमालय की ऊंची चोटियों से घिरा हुआ है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को नंदा देवी और त्रिशूल जैसी प्रमुख चोटियों के अद्भुत नजारे देखने को मिलते हैं।
रुद्रनाथ जाने वाला पैदल मार्ग केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के बफर जोन से होकर गुजरता है। कठिन चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालु हिमालयी प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते हुए धाम तक पहुंचते हैं।
शीतकाल में गोपेश्वर में होगी पूजा
सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण रुद्रनाथ धाम के कपाट बंद रहते हैं। इस अवधि में भगवान रुद्रनाथ की पूजा गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में संपन्न होती है।
धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य और कठिन पैदल यात्रा के लिए प्रसिद्ध रुद्रनाथ धाम श्रद्धालुओं के लिए आस्था, रोमांच और हिमालयी प्रकृति का अनूठा संगम है।