CM धामी ने 9.93 लाख पेंशनरों को जारी की ₹147 करोड़ से अधिक की पेंशन, दिव्यांगजन सिविल सर्विस कोचिंग शुरू

CM धामी ने 9.93 लाख पेंशनरों को जारी की ₹147 करोड़ से अधिक की पेंशन, दिव्यांगजन सिविल सर्विस कोचिंग शुरू

देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर गुरुवार को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला, देहरादून में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। इस मौके पर उन्होंने दिव्यांगजन सिविल सर्विस कोचिंग का शुभारंभ किया तथा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 23 वरिष्ठ नागरिकों और निबंध एवं पेंटिंग प्रतियोगिता में चयनित 05 छात्र-छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वन क्लिक के माध्यम से सितंबर माह की पेंशन राशि का भुगतान किया, जिसमें 9,93,886 पेंशनरों को ₹147 करोड़ 34 लाख 53 हजार की पेंशन उपलब्ध कराई गई। उन्होंने सभी उपस्थितजनों को वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण की शपथ भी दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण भी किया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी वरिष्ठजनों का स्वागत करते हुए अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और प्रदेश के समस्त वृद्धजनों के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों के सानिध्य में ही परिवार स्वयं को सुरक्षित अनुभव करता है। वृद्धजनों से बच्चों को संस्कार मिलते हैं और उनके सानिध्य में बच्चे जीवन के आदर्श सीखते हैं। उन्होंने कहा, “वृद्धजन हमारे परिवार के सुरक्षाकवच होते हैं, उनके कारण ही घर में अनुशासन रहता है और ईश्वर का वास होता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठजन अपने जीवन के अनुभवों से परिवार और समाज को आगे बढ़ाते हैं। परिवार में उनकी मौजूदगी से अपनापन और आत्मीयता का भाव आता है। वे हमारे जीवंत अनुभव और विरासत हैं। जीवन की गहरी समझ हमें वरिष्ठजनों के अनुभवों से ही मिलती है। उन्होंने अपने निजी जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके माता-पिता के संस्कारों की बड़ी भूमिका रही है। स्वर्गीय पिताजी की सीख आज भी उनका मार्गदर्शन करती है और माताजी का आशीर्वाद उन्हें शक्ति देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे प्रदेश के मुख्य सेवक होने के साथ-साथ प्रदेश के बेटे भी हैं। उत्तराखंड के प्रत्येक वरिष्ठजन के सम्मान, सुरक्षा और सुविधा उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को प्रतिमाह ₹1500 की पेंशन प्रदान की जा रही है, जिसमें पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 9 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को ₹147 करोड़ से अधिक की पेंशन उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न जनपदों में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान में बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित हैं। सरकार द्वारा देहरादून, अल्मोड़ा और चम्पावत में भी नए वृद्धाश्रम भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल सहित विभिन्न क्षेत्रों में गैर-सरकारी संगठनों द्वारा भी वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि समाज में वृद्धाश्रमों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए थी। हमारे वरिष्ठजनों को वृद्धाश्रम में नहीं, बल्कि परिवार के बीच सम्मान से रहने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और समग्र विकास के लिए कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम लागू किया है। दीनदयाल मातृ पितृ तीर्थाटन योजना के माध्यम से वरिष्ठजनों के लिए निःशुल्क यात्रा की व्यवस्था भी की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वरिष्ठजनों को आयुष्मान भारत योजना से मुफ्त इलाज की गारंटी मिली है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को विश्वास दिलाते हुए कहा कि “आपका ये बेटा कभी आपके सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं में कोई कमी नहीं होने देगा।”

इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों पर वृद्धजनों के सम्मान के लिए यह दूसरा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बीते 5 वर्षों में उत्तराखंड की दशा बदली है। भारतीय संस्कृति में बड़ों का सम्मान करने की परंपरा है और यह परंपरा हमेशा जीवंत रहनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से वृद्धजनों का सम्मान करने और उनकी सहायता करने का संकल्प लेने की अपील की।

कार्यक्रम में विधायक सविता कपूर, दायित्वधारी राम चंद्र गौड़, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, सचिव श्रीधर बाबू अद्वांकी, निदेशक संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण संजय सिंह टोलिया, संयुक्त निदेशक जी.आर. नौटियाल, पूजा नेगी, हेमलता पाण्डेय, गोरधन सिंह एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।