देहरादून में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशी नागरिकों से ठगी,पांच गिरफ्तार

देहरादून में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशी नागरिकों से ठगी,पांच गिरफ्तार

देहरादून, 14 अक्टूबर। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में विदेशी नागरिकों से ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का राजपुर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तरला नागल रोड स्थित आर्चिड पार्क में संचालित कथित फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी मोबाइल और लैपटॉप में एंटीवायरस ऐप उपलब्ध कराने के बहाने मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को निशाना बनाते थे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल के मुताबिक, राजपुर क्षेत्र में अवैध कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों से ठगी किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद राजपुर थानाध्यक्ष पीडी भट्ट को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए। सोमवार देर रात पुलिस की तीन टीमों ने कॉल सेंटर पर दबिश दी। इस दौरान कुछ युवक मौके से फरार हो गए, जबकि पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेरठ निवासी आशीष नगर, अक्षत शर्मा और अंशु मुद्गल तथा सुल्तानपुर निवासी राज सिंह और अभिनव सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने मौके से 14 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, एक आईपैड और ठगी में इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य उपकरण बरामद किए हैं।

नोएडा में काम करने के बाद देहरादून में खोला कॉल सेंटर

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी आशीष नगर पहले नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम करता था। वहां भी वह विदेशी नागरिकों को फोन कर इसी तरह की धोखाधड़ी करता था। करीब तीन महीने पहले नौकरी छोड़कर वह देहरादून आया और यहां अलग-अलग जगहों पर काम करने के बाद कथित तौर पर अपना कॉल सेंटर संचालित करने लगा।

एंटीवायरस के नाम पर 100 डॉलर का गिफ्ट कार्ड

जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, गिरोह ने विदेशी नागरिकों के करीब 5,000 मोबाइल नंबर खरीदे थे। आरोपी गूगल वॉइस ऐप के जरिए इन नंबरों पर कॉल करते और मोबाइल में खराबी होने की बात कहकर उसे ठीक करने के लिए अवास्ट एंटीवायरस ऐप डाउनलोड करने का झांसा देते थे।

इसके बदले ग्राहकों से 100 डॉलर मूल्य का गिफ्ट कार्ड खरीदने को कहा जाता था। पुलिस के अनुसार, भुगतान या गिफ्ट कार्ड मिलने के बाद कथित तौर पर केवल 10 प्रतिशत ग्राहकों को ही एंटीवायरस ऐप उपलब्ध कराया जाता था। आरोपी अपने मोबाइल नंबर को ट्रूकॉलर पर ‘बॉस’ नाम से सेव करके इस्तेमाल करते थे।

गिफ्ट कार्ड बेचकर खातों में लेते थे रकम

पुलिस के मुताबिक, विदेशी नागरिकों से हासिल किए गए गिफ्ट कार्ड कथित तौर पर चीनी नागरिकों को बेचे जाते थे और बदले में आरोपियों के खातों में पैसे जमा होते थे। गिरोह कुछ दिन एक स्थान पर कॉल सेंटर चलाने के बाद पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए जगह बदल देता था।

पुलिस मामले की जांच कर रही है। फरार आरोपियों की तलाश और बरामद उपकरणों की जांच के आधार पर ठगी के नेटवर्क तथा लेनदेन से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाई जा रही हैं।