पिथौरागढ़। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने अपने पिथौरागढ़ दौरे के दौरान मुनस्यारी में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 14वीं वाहिनी के अधिकारियों और जवानों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान उन्होंने सीमाओं की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रसेवा में आईटीबीपी के योगदान की सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि दुर्गम और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में भी आईटीबीपी के जवान जिस अनुशासन, समर्पण और उच्च मनोबल के साथ देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, वह पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा गौरवशाली रही है और यहां के सैनिकों ने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है।
उन्होंने जवानों से संवाद करते हुए उनके कार्यों की सराहना की और कहा कि सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ-साथ आपदा के समय लोगों की सहायता में भी आईटीबीपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
इसके बाद राज्यपाल गंगोलीहाट पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध मां हाट कालिका मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर समिति के पदाधिकारियों से भेंट कर मंदिर व्यवस्थाओं, धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं और क्षेत्र के विकास संबंधी विषयों पर चर्चा की।
राज्यपाल ने कहा कि मां हाट कालिका मंदिर कुमाऊं की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस धार्मिक स्थल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने पिथौरागढ़ जिले में पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों के बढ़ते विस्तार पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक धरोहर देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। राज्य सरकार और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं के विकास को और गति दी जा रही है।