देहरादून। आईसीएआर-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (आईआईएसडब्ल्यूसी) ने अपने मुख्यालय में 73वां स्थापना दिवस समारोह उत्साह और गरिमा के साथ मनाया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, अधिकारियों, किसानों और विभिन्न हितधारकों की सक्रिय भागीदारी रही।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट (निदेशक, सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान) उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में कहकशां नसीम (अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सारा) ने कार्यक्रम में शिरकत की।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में मृदा एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में संस्थान के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आईआईएसडब्ल्यूसी ने भूमि क्षरण को कम करने, वर्षा जल संरक्षण और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने सतत विकास के लिए संरक्षण तकनीकों को ऊर्जा दक्षता के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि ने स्प्रिंगशेड एवं नदी पुनर्जीवन के अनुभव साझा करते हुए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने के लिए संस्थान और राज्य एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।
संस्थान के निदेशक डॉ. एम. मदहु ने मृदा अपरदन नियंत्रण, भूमि क्षरण में कमी और वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में उत्पादकता वृद्धि की उपलब्धियों को विस्तार से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में डॉ. चरण सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।
भूमि क्षरण में कमी, उत्पादकता में बड़ा सुधार
संस्थान के अनुसार, जल अपरदन के कारण भूमि क्षरण में उल्लेखनीय कमी आई है—जो 39.87% (125.99 मिलियन हेक्टेयर) से घटकर 26.31% (86.04 मिलियन हेक्टेयर) रह गई है। संस्थान द्वारा 100 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जलग्रहण विकास कार्यक्रमों के तहत कार्य किया गया है।
आईआईएसडब्ल्यूसी की तकनीकों से:
फसल उत्पादकता में 40% से 412% तक वृद्धि
जल उपयोग दक्षता में 30% से 84% तक सुधार
उर्वरकों में सालाना ₹10,000 से ₹15,000 करोड़ तक की बचत
100 से अधिक तकनीकों का विकास
संस्थान ने मृदा संरक्षण, कृषि वानिकी, जल संचयन और निर्णय सहयोग प्रणाली सहित 100 से अधिक तकनीकों का विकास किया है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर में हजारों किसान, अधिकारी और विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं।
किसानों का सम्मान, ‘बुरांश’ पत्रिका का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने संस्थान की तकनीकों को अपनाकर अवनत भूमि को उपजाऊ बनाया। साथ ही तकनीकी पुस्तिकाओं और हिंदी पत्रिका ‘बुरांश’ का विमोचन भी किया गया।
इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद गतिविधियों का आयोजन भी किया गया, जिसमें करीब 160 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।