देह व्यापार में धकेली गई महिलाओं की बच्चियों के पुनर्वास के लिये ‘अपराजिता’ अभियान शुरू

रेनबो न्यूज़ इंडिया* 31 दिसंबर 2021

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध सेवा भारती संगठन ने दिल्ली में देह व्यापार में लगी महिलाओं एवं उनकी बच्चियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिये ‘अपराजिता’ अभियान शुरू किया है जिसमें स्कूल में दाखिला, छात्रावास, स्वास्थ्य देखरेख, आहार आदि की व्यवस्था की गई है।

सेवा भारती के महामंत्री सुशील गुप्ता ने बताया, ‘‘ अपराजिता अभियान की शुरूआत पायलट परियोजना के आधार पर की गई है जिसका शीर्षक ‘बच्चियों के पुनर्वास के माध्यम से देह व्यापार में लगी महिलाओं का पुनर्वास’ रखा गया है। ’’उन्होंने बताया कि अपराजिता अभियान का मकसद देह व्यापार में शामिल महिलाओं की बेटियों का पालन पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा की व्यवस्था करके मजबूरी में इस क्षेत्र में कदम रखने वाली महिलाओं की श्रृंखला को तोड़ना है।

उन्होंने बताया कि साल 2020 और 2021 में कोरोना से प्रभावित काल में देह व्यापार में लगी महिलाओं की स्थिति दयनीय हो गई, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया । ऐसे में सेवा भारती ने इस दिशा में प्रयास शुरू किया और दिल्ली पुलिस के सहयोग से प्रयोग के तौर पर अभियान शुरू किया।

सेवा भारती के महामंत्री ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार दिल्ली के जी बी रोड़ इलाके में 2830 महिलाएं देह व्यापार में लगी हैं जिन्हें बहलाकर, डरा-धमका, अपहृत करके इस क्षेत्र में धकेला गया है।उन्होंने बताया कि ऐसे में दिल्ली उच्च न्यायालय के कुछ वकीलों, दिल्ली विश्वविद्यालय की कुछ प्रोफेसरों सहित दिल्ली पुलिस के सहयोग से हमने ‘अपराजिता अभियान’ शुरू किया है। इन बच्चियों के लिये ‘शांति निकेतन’ में रहने की व्यवस्था की गई है ।

वहीं, दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार ने कहा कि यह एक काफी अच्छा अभियान है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद जाकर व्यवस्था को देखा है और इसमें सहयोग भी कर रहे हैं । इस अभियान से आगे दिल्ली पुलिस और कैसे जुड़ सकती हैं, इसे अंतिम रूप दे रहे हैं ।

सेवा भारती की पदाधिकारी एवं अभियान की संयोजिका सुनीला सप्रा ने बताया कि अभी सात बच्चियां शांति निकेतन में रह रही हैं और इनका स्कूल में दाखिला करा दिया गया है।उन्होंने बताया कि हम इन बच्चियों को इनकी मां की सहमति से लाए हैं । अगर इन बच्चियों का जन्म इस क्षेत्र में हुआ है तब इसमें इनकी क्या गलती है। इन्हें भी अन्य बच्चों के समान अवसर मिलनी चाहिए।

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